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Monday, September 3, 2012



  • रसिकबिहारी -कृष्णबिहारी, नवलबिहारी ,विपिनबिहारी ।
  • जगमोहन-विनोदबिहारी,प्रमोदबिहारी ।
  • विनोद बिहारी-शैलेन्द्र,शचीन्द्र,शिवेंद्र ।
  • प्रमोद बिहारी -देवेन्द्र मोहन,राजेंद्र मोहन।
  • शैलेन्द्र -अभिनव,अंकित ।
  • देवेन्द्र मोहन-अमिताभ,अजिताभ,अनुज।
  • कृष्णबिहारी- बृजकिशोर,नवलकिशोर, श्यामकिशोर,कृष्ण किशोर ।
  • बृजकिशोर-ललितकिशोर,नवनीत किशोर ,निकुंज किशोर ।
  • ललितकिशोर -पुष्यमित्र ,पार्थ सारथी ।
  • नवनीत किशोर- अक्षत ।
  • निकुंजकिशोर -अंचित।
  • नवल किशोर -गोपाल कृष्ण,श्यामकृष्ण,श्री कृष्ण ,योगेश कृष्ण,बृजेश कृष्ण,राजेश कृष्ण। 
  • गोपाल कृष्ण-सुभाष,सुहास।
  • श्याम कृष्ण -रक्षित,रथीश ।
  • श्रीकृष्ण -गौरव।
  • बृजेश कृष्ण-सौरभ।
  • राजेश कृष्ण -विश्वजीत,अभिजीत। 
  • कृष्ण किशोर -शरदकुमार ।
  • शरद कुमार -प्रांशु कुमार,अमृतान्शु  कुमार ।
      यह वंशावली माननीय श्री हेमशंकर शुक्ल द्वारा रचित "कीर्ती मन्जूषा " से साभार । 




जिस वंश से मैं हूँ आईये उसके वटवृक्ष से आपका परिचय करवाऊं। हो सकता है अलग हुईं और भी शाखाएं यहाँ फिर जुडें।

जिस वंश का यहाँ ज़िक्र होगा वह है "मिश्र " वंश। मान्झगांव ,भगवंतनगर के देवमणि शाखा के मिश्र ।
देवमणि ऑक के माँझगाँव के मिश्रों को भगवंतनगर में 'महलहा'कहा जाता रहा है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है इस वर्ग के वहां रहने वाले सभी व्यक्तियों के मकान आपस में जुड़े हुए, दो मंजिलें,लखौरी,या ककैया इंटों से बने,चूने के प्लास्टर से युक्त,एक विशाल एवं भव्य महल से ही दिखते रहे हैं।

इस वंशवली को हम संक्षिप्त रूप में देखते हुए चलते हैं एक के बाद एक। यहाँ हमने अपने वृक्ष को देखना शुरू करेंगें देवमणि से ही :

यहाँ मात्र उस शाखा को लिया गया है जो हमारे  परिवार तक पहुँचती है ..पं . नवल किशोर मिश्र,भगवंतनगर 

  • देवमणि -.केशवराय ,जटाशंकर ।
  • केशवराय -शिवगोविन्द, मोतीलाल ,जागेश्वर,.शम्भुनाथ। 
  • जटाशंकर - देवदत्त ।
  • देवदत्त -  रामकृष्ण, सुखनंदन ।
  • सुखनंदन - शिवप्रसाद ,गजाधर ,सदानंद ।
  • सदानंद -सांवले कृष्ण ,क्षेमराज ।
  • सांवले कृष्ण - मुखलाल,ब्रह्मानंद, सिद्धिनाथ ,ठाकुरप्रसाद , बालगोविन्द ,कुञ्ज बिहारी।                                                                                                                                                                       
  • कुंजबिहारी - मुरलीधर। 
  • मुरलीधर - नंदकिशोर, बांकेबिहारी, बनवारीलाल। 
  • नंदकिशोर - लालबिहारी ,युगलकिशोर, रसिकबिहारी ।
  • लालबिहारी -मदनमोहन,.बृजमोहन ,जगमोहन।



"अमूमन हर भारतीय परिवार आज भी कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में
 एक डोर से जुड़ा हुआ है । पाश्चात्य की एकल सभ्यता शुरू तो हुई है मगर
अलग अलग रह कर भी त्यौहार या समारोह  आज भी जोड़े हुए हैं । इसलिए
 पारिवारिक तहज़ीब  जो  हमारी ख़ासियत  है आज भी ज़िन्दा है ।


परिवार, पीढ़ी दर पीढ़ी अपना अस्तित्व बनाये रखते हैं। हर परिवार की अपनी
 कहानी,अपनी विरासत,अपना गर्व अपनी पहचान। हम आज जो भी हैं कहीं न
कहीं अपनी इसी विरासत के कारण। ये गुण जो हम में आयें हैं ये हमारे बड़ों का
 ही तो आशीर्वाद है। आज जो भी  प्रशंसा हम औरों से पाते हैं उसमे हमारे
बड़ों का पूरा योगदान है। मगर एक प्रश्न यहाँ आप सभी से-हम कितना जानते
हैं अपने अपने परिवार के विषय में? ज़्यादा से ज़्यादा  दो पीढ़ियों पूर्व तक। उसके
बाद? और हमारे बाद आने वाली पीढ़ी कितना जान पायेगी हमारे परिवार के
विषय में? क्या वे भी उतना ही जान पायेंगें जितना हम ..शायद नहीं ..उससे
कम। फिर क्या कर किया जाये की हमारी धरोहर सुरक्षित बनी रहे और
पीढ़ी दर पीढ़ी याद भी रखी जाए।

बस इसी विचार ने मुझे इस ब्लॉग की और प्रेरित किया।अति आधुनिक
तकनीकी युग में यह तो बहुत आसान  हो गया है ।बस फिर क्या था जुट
गई अपनी विरासत की सुरक्षा में और यहाँ है मेरा परिवार (पैतृक) हम
सभी के बीच।"

                                                                            ~स्मिता राजेश~



    आभारी हूँ: 


   आदरणीय पापा श्री श्याम कृष्ण मिश्र की जिनकी लिखी पुस्तकों से  इस ब्लॉग को सजाया है ।
    अपने पति श्री राजेश तिवारी की जिन्होंने मुझे इस  रचनात्मकता हेतु  समय प्रदान कर 
    अपरोक्ष रूप से सहयोग प्रदान किया। 


   और अपने बेटों ऐश्वर्य तिवारी विशेष तिवारी की जिन्होंने अपना कंप्यूटर मुझे मेरी 
   सुविधानुसार इस्तेमाल कर लेने का अमूल्य सहयोग दिया ।


   साथ ही अपने दोनों भाईयों रक्षित मिश्र एवं रथीश मिश्र की जिनका होना ही मेरे लिए संबल बना 
   और  आभारी हूँ -
   अपनी माँ  श्रीमती रमा मिश्रा  की जिन्होंने जूझने की प्रवृत्ति दी और एक विश्वास कायम रखा 
   अपनी बेटी पर । 

   समस्त 'मिश्र परिवार ' का भी आभार जिन्होंने एक सांस्कृतिक परिवेश दिया । 

  


 




                                                     समर्पित 

                 (स्व)  श्रीमती सोमवती  देवी  मिश्रा (आ .अम्मा )




                                   आशीर्वाद जिनका साथ रहा : 

                               श्री गोपाल कृष्ण मिश्र  (दादा )
                               श्री बृजेश  कृष्ण मिश्र (भैय्या चाचा )
                               श्री योगेश कृष्ण मिश्र (मुन्ना चाचा ) 

                       आप चाहें हमारे साथ नहीं मगर आपका आशीर्वाद हमारे साथ है 
                            

aadaranjali: ek beti ki uske parivaar ko