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Monday, September 3, 2012




"अमूमन हर भारतीय परिवार आज भी कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में
 एक डोर से जुड़ा हुआ है । पाश्चात्य की एकल सभ्यता शुरू तो हुई है मगर
अलग अलग रह कर भी त्यौहार या समारोह  आज भी जोड़े हुए हैं । इसलिए
 पारिवारिक तहज़ीब  जो  हमारी ख़ासियत  है आज भी ज़िन्दा है ।


परिवार, पीढ़ी दर पीढ़ी अपना अस्तित्व बनाये रखते हैं। हर परिवार की अपनी
 कहानी,अपनी विरासत,अपना गर्व अपनी पहचान। हम आज जो भी हैं कहीं न
कहीं अपनी इसी विरासत के कारण। ये गुण जो हम में आयें हैं ये हमारे बड़ों का
 ही तो आशीर्वाद है। आज जो भी  प्रशंसा हम औरों से पाते हैं उसमे हमारे
बड़ों का पूरा योगदान है। मगर एक प्रश्न यहाँ आप सभी से-हम कितना जानते
हैं अपने अपने परिवार के विषय में? ज़्यादा से ज़्यादा  दो पीढ़ियों पूर्व तक। उसके
बाद? और हमारे बाद आने वाली पीढ़ी कितना जान पायेगी हमारे परिवार के
विषय में? क्या वे भी उतना ही जान पायेंगें जितना हम ..शायद नहीं ..उससे
कम। फिर क्या कर किया जाये की हमारी धरोहर सुरक्षित बनी रहे और
पीढ़ी दर पीढ़ी याद भी रखी जाए।

बस इसी विचार ने मुझे इस ब्लॉग की और प्रेरित किया।अति आधुनिक
तकनीकी युग में यह तो बहुत आसान  हो गया है ।बस फिर क्या था जुट
गई अपनी विरासत की सुरक्षा में और यहाँ है मेरा परिवार (पैतृक) हम
सभी के बीच।"

                                                                            ~स्मिता राजेश~

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